कोरोनाकाल में MCU प्रशासन की शर्मनाक हरकत - TheKhabars.com

Breaking

Subscribe Us

BANNER 728X90

Saturday, 25 April 2020

कोरोनाकाल में MCU प्रशासन की शर्मनाक हरकत

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (TheKhabars.com)

आज पूरा विश्व कोरोना महामारी से उपजे संकट से जूझ रहा है। विश्व की दो तिहाई से अधिक आबादी आंशिक या सम्पूर्ण रूप से अपने घरों में कैद है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। पिछले महीने भर से यहाँ सम्पूर्ण लॉकडाउन है। केवल अतिआवश्यक सेवाओं को ही इससे छूट मिली हुई है। देशभर में अकादमिक गतिविधियां ठप है। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय अनिश्चिकालीन बंद हैं। ऐसे में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्विद्यालय में फीस वसूली की कवायद चल रही है। जबकि प्रधानमंत्री व शिक्षा मंत्री खुद शिक्षण संस्थानों को फीस वसूली से बचने की सलाह दे चुके हैं।

दरअसल विवि में त्रैमासिक फीस जमा करने का समय हो चला है। जिसे mp online पोर्टल के माध्यम से ही भरा जा सकता है। लेकिन कोरोना संकट के चलते काफी छात्र अपने दूर-दराज के गाँव या छोटे शहरों में फंसे हैं। जहाँ से ऑनलाइन पेमेंट कर पाना लगभग असंभव ही है। जो विद्यार्थी दिल्ली, नोएडा या भोपाल में हैं उनके लिए भी बाहर निकलकर साइबर कैफे पहुंचना मुश्किल है। गौरतलब है कि ये तीनों शहर भारत में कोरोना के प्रमुख केंद्र हैं। लेकिन विवि प्रशासन इन सब बातों की कोई चिंता किये बगैर वसूली की जुगत में लगा है।

इस महीने की शुरुआत में ही नोएडा कैंपस के विद्यार्थियों को पाँच दिन के भीतर फीस जमा करने की सख्त हिदायत दी गई थी, जिसे भारी विरोध के बाद वापस ले लिया गया। अब समझना मुश्किल है कि इसके बाद फिर से फीस क्यों मांगी जा रही है? क्या विवि प्रशासन की नजरों में स्थिति सामान्य हो चुकी है? क्या भोपाल या नोएडा में बाहर जाकर पैसे जमा करने वाले विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी विवि प्रशासन लेती है?  ऐसे कई सवाल हैं जिसके जवाब छात्र, प्रशासन से चाहते हैं। इसी बाबत नोएडा परिसर के विद्यार्थियों ने विवि प्रशासन को एक खुला पत्र लिखा। इसपर सोशल मीडिया के माध्यम से उनका ध्यान आकर्षित कराया गया।

पत्र 

आज पूरा देश कोरोना संकट से जूझ रहा। ऐसे में मुख्य कैंपस सहित हमारे सभी कैंपस बंद है। लेकिन ऐसी स्थिति में भी पिछले दिनों नोएडा कैंपस में छात्रों को फीस के लिए नोटिस आया। जिसमें पाँच दिनों के भीतर फीस जमा कर देने की सख्त हिदायत दी गई थी। जिसे विरोध के बाद अस्थाई रूप से वापस ले लिया गया। आपको पता ही होगा कि परिसर के अधिकतर विद्यार्थी दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं और वे अभी गांवों में ही फंसे हैं। जहाँ से ऑनलाईन पेमेंट करना लगभग नामुमकिन ही है। केंद्र सरकार की तरफ से भी साइबर कैफे खोलने का कोई आदेश नहीं आया है। ऐसे में ऑनलाइन फीस के लिए दबाव बनाना, अनैतिक-सा पड़ता है।

दूसरा अगर साइबर कैफे खुल भी गया तो ऐसी स्थिति में पैसे आएंगे कहाँ से? इसलिए आपसे निवेदन है कि इस इंस्टॉलमेंट की फीस विश्विद्यालय अपनी ओर से ही जमा कराए। इससे विवि की आर्थिक स्थिति पर कुछ खास असर नहीं होगा लेकिन निम्न स्तर के विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी जब विश्वविद्यालय बन्द ही है तो इसका खर्च भी स्वाभाविक रूप से कम हो गया होगा। गेस्ट टीचरों का पूरा पैसा तो बच ही रहा है। ऊपर से कई प्रोफेसर्स को निकालने के बाद उनकी मोटी तनख्वाह भी बच ही रही होगी। सेमिनार, वर्कशॉप सब बन्द है। बिजली-पानी का बिल भी नहीं लग रहा।

ऐसे में विश्वविद्यालय के पास पैसों की कमी तो नहीं होगी! महोदय/महोदया वैसे भी पिछले कुछ समय से विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसलों ने विद्यार्थियों को रुष्ट कर रखा है। इसमें एक और नया अध्याय जोड़ने से आपको बचना चाहिए। आपके लिए फीस माफ करना बड़ी बात नहीं है लेकिन अभी के समय में विद्यार्थियों के लिए इसे जमा करना मुश्किल है। अतः आप से निवेदन है कि इस इंस्टॉलमेंट का फीस लिए बगैर फॉर्म सबमिशन शुरू करवाइये। अन्यथा विद्यार्थियों द्वारा इस विषय को जल्द ही आंदोलन का रूप दे दिया जायेगा। नए निज़ाम को इससे बचना चाहिए।

लेकिन इसके बावजूद विवि प्रशासन की चुप्पी निराशाजनक है। फीस को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। छात्रों के बीच असंतोष और अनिश्चितता का माहौल है।


--मृतुन्जय कुमार

No comments:

Post a comment

If you have any doubts, Please let me know.