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Mulayam singh Yadav birthday: मुलायम ने सुप्रीम कोर्ट में दिये हलफनामे में अपनी दूसरी पत्नि की बात स्वीकारी थी, जिससे..



मुलायम सिंह यादव, जन्मदिन विशेष


एक गरीब किसान परिवार के बेटे ने यूपी की राजनीति में तहलका मचा दिया, वे जीवन की कुश्ती से लेकर राजनीति की कुश्ती तक के सफर में कब यूपी की सियासत के बादशाह बन जायेंगे, ये शायद मुलायम ने भी न सोचा होगा


पृष्ठभूमि


मुलायम सिंह का जन्म सैफई, इटावा के एक गरीब किसान परिवार में हुआ था, उनके पिता सुघर सिंह एवं माता का नाम मूर्ति देवी है.. मुलायम सिंह ने आगरा विश्वविधालय से एम. ए. और करहल, मैनपुरी के जैन इण्टर कॉलेज से बी. टी. की पडाई की थी और इसके बाद करहल के इण्टर कॉलेज में वह अंग्रेजी के मास्टर भी रहे..


दो शादी


मुलायम सिंह यादव की दो शादी हुईं थी उनकी पहली शादी मालती देवी से हुई थी, जिनके पुत्र अखिलेश यादव हैं, लेकिन इसी दरम्यान मुलायम खुद से 20 साल छोटी लड़की साधना गुप्ता को भी अपना दिल दे बैठे, और नेताजी ने उनसे शादी भी कर ली, जिनके पुत्र प्रतीक यादव हैं. मुलायम की दूसरी शादी का मामला उनके सहयोगी अमर सिंह ने रैलीयों में खूब उछाला, और ऐसा कहा जाता है, कि जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दे अपनी दूसरी पत्नि होने की बात स्वीकारी थी, तब उनके पुत्र अखिलेश भी इस बात से अंजान थे.


सियासी सफर

एक बार सैफई के एक मंच पर कविता पाठ हो रहा था, और एक पुलिसवाला कवियों को कविता पढ़ने से रोक रहा था, ये बात मुलायम को बिल्कुल भी रास नहीं आई, और उन्होंने मंच पर ही उस पुलिसवाले को उठाकर पटक दिया, और यहीं से नेताजी के सियासी कुश्ती की नींव पड़ती है


वहां कुश्ती में ही जसवंत नगर के विधायक और मुलायम सिंह के पहले राजनीतिक गुरू नत्थूराम की उनपर नजर पडी़. इसके बाद मुलायम समाजवादी आन्दोलनों में भाग लेते रहे, वे कुश्ती में जीतते थे, ईनाम भी मिलते थे, लेकिन घर नहीं चला पाते थे..कुछ समय बाद नत्थूलाल का स्वास्थय खराब हो गया, और उन्होंने मुलायम को जसवंत नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने को कहा..और अपने पहले ही चुनाव में मुलायम ने अपने विरोधी लाखन सिंह को धूल चंटा दी, और सबसे कम उम्र 28 साल के विधायक बने..


जब मुलायम बने मुख्यमंत्री


मुलायम सिंह अपने सियासी सफर में देखते ही देखते अखाडे़ से लेकर लखनऊ की गद्दी तक पहुंच गये

जब 1975 में इमरजेंसी लगायी गयी, तब मुलायम भी इसके खिलाफ थे, और इसीलिए उन्हें 19 महीने इटावा की जेल में बिताने पडे़. लेकिन जब यूपी में जनता पार्टी की सरकार में राम नरेश यादव सीएम बने, तो मुलायम को पहली बार सहकारिता मंत्री बनाया गया..


जब केन्द्र में बीपी सिंह की सरकार थी, उस दौरान उन पर हमला भी हुआ, उस हमले में मुलायम बाल-बाल बच गये..और इस हमले के बाद वह वीपी सिंह के धुर विरोधी बन गये. इसके बाद चौधरी चरण सिंह ने मुलायम को यूपी विधानपरिषद में विपक्ष का नेता बनवा दिया, लेकिन चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह की मुलायम से नहीं बनी, और लोकदल पार्टी टूट गयी. तब मुलायम ने 7 दलों को मिलाकर क्रांति मोर्चा बनाया, और यूपी की यात्रा में निकल पडे़, उन्हें यूपी में जनता दल का अध्यक्ष बनाया गया. और 1989 का चुनाव नेताजी के नेतृत्व में लडा़ गया..और 5 दिसंबर 1989 को मुलायम सिंह यादव यूपी के पहली बार मुख्यमंत्री बने.


प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गये


जब केन्द्र में संयुक्त मोर्चा की सरकार थी, तब मार्क्सवादी नेता हरकिशन सिंह सुरजीत उनके पास एक शुभ संदेश लेकर पहुंचे, उन्होंने नेताजी से कहा, कि आपका नाम प्रधानमंत्री के लिये तय कर लिया गया है, लेकिन तब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसका विरोध किया..मुलायम को दिल्ली की गद्दी तो नसीब नहीं हुई, लेकिन उन्हें केन्द्र की सरकार में रक्षा मंत्री का पदभार सौंप दिया गया.


तो ये थी मुलायम सिंह यादव के जीवन की कुश्ती से लेकर राजनीतिक कुश्ती तक की कहानी, आज उनका जन्मदिन है..The Khabars भी उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाऐं प्रेषित करता है!


~ RL Harsh 

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