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मिलिए आइआरएस पद्मपाणि बोरा से जिसने कोरोना काल में लोगों के घर तक मदद पहुंचाया

 


नई दिल्ली:- चीन से निकलकर विश्व में अपना आतंक मचाने वाले कोरोना में कई लोगों ने अपने करीबियों को खोया कई लोगों ने अपने जॉब, रोजगार को खोया ऐसे में कई ऐसे लोग आए जो उन हालातों में एक दूसरे के लिए सहारा बनकर आए. उनमे से एक है आइआरएस पद्मपाणि बोरा.


24 घंटे का हेल्पलाइन नंबर स्टार्ट कर सुनते थे लोगों की समस्या


पद्मपाणि बोरा 2009 बैच के आईआरएस है, और अभी आयकर विभाग में वरिष्ठ अधिकारी है. है वो बताते हैं कि जब कोरोना की दूसरी लहर आई तो यह सूचनाएं आ रही थी कि लोगों को इलाज नहीं मिल रहा है,  हॉस्पिटल में ऑक्सिजन और बेड लोगों को नहीं मिल रहा है. इसलिए मैंने अपनी दस लोगों की टीम बनाई और लोगों की मदद करने के लिए 24 घंटे का एक हेल्पलाइन नंबर चालू कराया था, इस अभियान का नाम हमने सारथी रखा था. खास तौर से देश विदेश में अलग अलग स्थानों पर जो असमी लोग रहते थे, उन्हें मदद कैसे पहुंचे इसकी व्यवस्था हमने सारथी के माध्यम से की. धीरे धीरे पूरे देश के लोगों के फोन आने लगे, वो हमें अपनी समस्या बताते थे और हम अपने प्रयासों से उनकी मदद मदद करते थे, चाहे वो दवाई की हो,राशन की हो या वो स्वास्थ्य संबंधी की समस्या ही क्यों न हो. हम लोगों को टेली मेडिकल की भी सुविधा देते थे.  पद्मपाणि बताते हैं कि हमारी टीम में 10 डॉक्टर लोग थे जो शिफ्ट ले आधार पर काम करते थे. उन्होंने कहा कि हमने एक ऑफिस बनाया था जहां से वार रूम चला रहे थे.


पूरे असम राज्य में पहला सेरोसर्वे कराने में अहम योगदान


मूलतः असम से के रहने वाले पद्मपाणि बोरा ने कोरोना की पहली लहर में भी चर्चा में थे, उन्होंने असम का पहला सेरो सर्वे कराने में अहम योगदान था. ताकि असम में कोरोना के फैलने का कारण पता चल सके. पद्मपाणि कहते हैं कि सेरो सर्वे हमें संक्रमण दर का पता लगाने में मदद करता है. इससे पता चलता है कि कितने लोगों में एंटी-बॉडी हैं या हम हर्ड इम्यूनिटी से कितने दूर हैं. यह हमें उन लोगों में एंटी-बॉडीज के बारे में भी बताएगा जिन्हें पहले से ही टीका लगाया जा चुका है. इसलिए हमने असमके नौ जिलो में भी कराया था.


सोशल मीडिया का किया सकारत्मक प्रयोग


पद्मपाणि बताते हैं कि 'सारथी' जब हमने शुरू किया था तो हमने व्हाट्सएप ग्रुप का सकारात्मक प्रयोग किया. ऐसी स्थिति में सोशल मीडिया का सकारात्मक प्रयोग किया जा सकता है।जिससे लोग अवेयर हों सके, अभी ओमिक्रोन को लेकर देश में उथल पताल है. ऐसे में हमने अभी से तैयारी शुरू कर दिया है ताकि लोगों के बीच मदद जा सके.

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