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Javed Akhtar B'DAY: बहुत संघर्ष के बाद पहुंचे एक बड़े मुकाम पर



भारतीय सिनेमा के सबसे पसंदीदा राइटर, स्क्रीनराइटर और लिरिसिस्ट जावेद अख्तर का आज 76वां जन्मदिन है. जावेद शुरुवात से ही शायरों के परिवार से ताल्लुकात रखते हैं. उन्हें शायरी का गुण अपने पूर्वजों से मिला है. जावेद ने इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए बहुत मेहनत की है. और आज उनका ओहदा इंडस्ट्री में अलग ही है। आज उनके जन्मदिन के खास मौके पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें. 

जावेद का असली नाम जादू था. माँ के निधन के बाद उन्होंने अपना बचपन नाना नानी के साथ बिताया है.  राइटर बनने के लिए उन्होंने अपनी शुरुआत बॉम्बे नगरी से की. छोटे-मोटे काम करते हुए जावेद की मुलाकात सरहदी लुटेरे के सेट पर सलीम से हुई। सलीम उस फिल्म में एक्टर थे और जावेद प्रोडक्शन का काम कर रहे थे। देखते-ही-देखते लेखन में दिलचस्पी रखने वाले दोनों की दोस्ती हो गई। दोनों को लिखने का तो शौक था, लेकिन इस नई जोड़ी को कोई काम देने के लिए तैयार नहीं था।

उस समय एस एम सागर को युवा राइटर्स की जरुरत पड़ी। जावेद उस समय उर्दू में लेखन करते थे और बाद में उसे हिंदी में ट्रांसलेट किया जाता था। काम पसंद आने पर एस एम सागर ने दोनों को काम दिया। रे-धीरे सलीम और जावेद की जोड़ी इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने लगी, लेकिन उस समय स्क्रिप्ट राइटर्स को क्रेडिट नहीं मिलता था। राजेश खन्ना ही वो पहले स्टार थे जिन्होंने इस जोड़ी पर भरोसा करके इन्हें बड़ा ब्रेक दिया। राजेश खन्ना ने उन्हें अपनी फिल्म हाथी मेरे साथी में स्क्रीनप्ले राइटर का काम दिया। 

ये फिल्म हिट रही और साथ ही इसके साथ ही लेखकों को क्रेडिट दिया जाने लगा। हाथी मेरे साथी के साथ ही इस जोड़ी ने अंदाज, अधिकार, सीता और गीता, यादों की बारात, जंजीर, हाथ की सफाई, दीवार, शोले, चाचा-भतीजा, डॉन, त्रिषूस, दोस्ताना, क्रांति, जमाना, मिस्टर इंडिया जैसी कई हिट फिल्में दीं। इस जोड़ी की लिखी हुई 24 फिल्मों में से 20 हिट थीं। साल 1971 से 1982 तक साथ काम करने के बाद दोनों की जोड़ी वैचारिक मतभेदों के चलते टूट गई। दोनों ने अलग-अलग फिल्में लिखनी शुरू कर दीं। 

जावेद को उनके गीतों, पटकथा और लेखन के लिए 14 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। बेहतरीन काम के लिए उन्हें 5 बार नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है।  साल 1999 में जावेद अख्तर को पद्मश्री और 2007 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। साल 2020 में धर्मनिरपेक्षता और फ्री थिंकिंग को बढ़ावा देने के लिए जावेद को रिचर्ड डॉकिन्स अवॉर्ड मिला है। ये अवॉर्ड हासिल करने वाले जावेद पहले भारतीय हैं। 

जावेद को उनकी पोएट्री कलेक्शन लावा के लिए 2013 में साहित्य एकेडमी अवॉर्ड से नवाजा गया है जो साहित्य में दूसरा सर्वोत्तम सम्मान है। जावेद अख्तर ने साल 1972 में हनी ईरानी से शादी की थी। दोनों के दो बच्चे फरहान अख्तर और जोया अख्तर हैं। शबाना आजमी, मशहूर उर्दू राइटर कैफी आजमी की बेटी हैं। लेखन के सिलसिले में जावेद अक्सर कैफी साहब से मिलने जाया करते थे, जहां उनकी मुलाकात 10 साल छोटी शबाना से हुई। कुछ दिनों में ही दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया।

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