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Upcoming election 2022: डिजिटल चुनाव प्रचार में किसके है फ़ायदे



नई दिल्ली:  कोरोना महामारी के समय में होने वाले उत्तर प्रदेश और 4 प्रदेशों में विधानसभा चुनाव के ऐलान होते ही चुनाव आयोग ने रैलियों और रोड शो पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस कारण से यह चुनाव डिजिटल चुनाव होगा। इस ऐलान के साथ ही कुछ राजनीतिक दलों ने जहां इस फैसले का स्वागत किया है तो वहीं कुछ दल घबराहट में पड़ गए हैं।  


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कोरोना के संक्रमण बढ़ने के साथ ही वर्चुअल तरीके से लोगों तक पहुंच बनाने और प्रचार कराने को लेकर राजनीतिक दलों पर दबाव बढ़ गया है। इन सभी तैयारियों के लिए तकनीकी दक्षता के साथ पार्टी संसाधनों की भी जरूरत होगी। चुनाव एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे में बीजेपी को प्रचार के मामले में अन्य राजनीतिक दलों से बढ़त मिल सकती है और इसके कई कारण हैं। इतना ही नहीं भाजपा का प्रचार अन्य पार्टियों के प्रचार में कई गुना अंतर दिखाई देगा इस चुनाव में । बीजेपी का डिजिटल विभाग एकदम सक्रिय हो गया है। 


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टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपने एक रिपोर्ट में बीजेपी के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी के हवाले से बताया कि बीजेपी कोरोना के प्रकोप के बाद से ही पिछले दो वर्षों से डिजिटल अभियानों की तैयारी कर रही थी। बलूनी ने बताया कि जमीनी स्तर पर हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों तक पहुंचने के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी कोरोना के दिशानिर्देशों का पालन करेगी। 


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भाजपा प्रवक्ता बलूनी ने यह भी बताया कि बूथ स्तर सहित पार्टी के सभी कार्यालयों में वर्चुअल कैंपेन के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा एक तथ्य यह भी है कि दूसरी पार्टियों की अपेक्षा बीजेपी चुनाव प्रचार पहले ही शुरू कर चुकी है। उत्तर प्रदेश में पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित कई बड़े नेता चुनाव की तारीख की घोषणा के कई दिनी  से ही पूरे यूपी में रैलियां और अन्य कार्यक्रम कर रहे हैं। 


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उधर बीजेपी ने हाल ही में अपनी समीक्षा बैठकों में भी पार्टी की IT टीम को तैयार रहने के लिए कहा है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि बीजेपी ने डिजिटल अभियान की तैयारी कोरोना की पहली लहर से कर दी थी जबकि दूसरी लहर में इसको तेज कर दिया था। हर जिले में बीजेपी कार्यालय बनाने के साथ ही उसमें IT विभाग का कमरा भी निर्धारित कर दिया गया था, जहां पर भाजपा पार्टी के अपने कार्यालय नहीं थे, वहां पर इसकी तैयारी शुरू कर दी गई थी।


इसके उलट चुनाव आयोग के ऐलान के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस पर न खुश है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी के लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कब्जा जमाए हुए हैं। अखिलेश ने कहा कि जिन वर्कर के पास संसाधन नहीं है वो वर्चुअल रैली कैसे करेंगे। जो छोटी पार्टियां हैं उन्हें कैसे स्पेस मिलेगा। अखिलेश यादव का कहना है की भाजपा डिजिटल हावी है। अब जैसे कि चुनाव डिजिटल प्रचार की घोषणा हो गयी है सभी पार्टी अपने अपने डिजिटल तरीक़े से तैयार हो रहे है।

- Aryan Singh


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