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कोरोना से गंभीर रूप से बीमार हुए लोगों को क्या मंकीपॉक्स से खतरा हो सकता है?

 




नई दिल्ली: देश में कोरोना महामारी एंडेमिक फेज में है. एक्टिव मरीजों की संख्या भी 16 हजार से कम रह गई है. इस बीच दुनियाभर में मंकीपॉक्स का खतरा मंडराने लगा है. करीब 15 देशों में मंकीपॉक्स के 131 मामले दर्ज किए गए हैं और 106 संदिग्ध मरीज भी मिले हैं. ये वायरस तेजी से अपने पैर पसार रहा है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी मंकीपॉक्स से बचाव के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. भारत में भी इस वायरस के खतरे को देखते हुए  सर्विलांस बढ़ा दिया गया है. खासतौर पर जिन इलाकों में विदेशी पर्यटक आते हैं. वहां उनकी जांच और संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं. 


एक्सपर्ट का कहना है कि भारत में इस वायरस से खतरा नहीं है. इससे पहले जब मंकीपॉक्स वायरस का आउटब्रेक अफ्रीका में जब भी हुआ है यह किसी एक इलाके तक ही सीमित रहा है. पहले कभी भी वायरस का खास असर नहीं देखा गया है. इस वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध है. इसके लक्षण भी चिकन पॉक्स और स्मॉल पॉक्स की तरह हैं. ये वायरस कोरोना जितना खतरनाक नहीं है, लेकिन जो लोग कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार हुए थे. उनको इससे बचाव करने की जरूरत है. क्योंकि कोरोना  की वजह से लोगों की इम्युनिटी कमजोर हो गई है. जिससे मंकीपॉक्स का वायरस उन पर असर कर सकता है. जो लोग डायबिटीज, हाइपरटेंशन, लिवर, हार्ट और किडनी की बीमारी के मरीज है. उनको खास एहतियात बरतनी चाहिए. 


दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के लिवर एंड गैस्ट्रोलॉजी इंस्टीट्यूट के एचओडी प्रोफेसर डॉ. अनिल अरोड़ा का कहना है कि कई सालों बाद मंकीपॉक्स का वायरस फिर से फैल रहा है, हालांकि इसको लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है. मंकीपॉक्स का ट्रांसमिशन एक से दूसरे इंसान में कम होता है. इसकी होने की आशंका तब ज्यादा होती है जब कोई व्यक्ति किसी संक्रमित जानवर के संपर्क में आए. इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो भी गया है तो ये जानलेवा नहीं होता है. इसके लक्षण कुछ दिन में ठीक हो जाते हैं. बस इस दौरान संक्रमित व्यक्ति अपनी सेहत का ध्यान रखें और किसी के संपर्क में न आए. 


कोरोना से संक्रमित हुए लोगों पर होगा असर?

प्रोफेसर अरोड़ा कहते हैं कि जो लोग कोरोना से गंभीर रूप से बीमार हुए हैं. उनको फिलहाल खास ध्यान रखना चाहिए. क्योंकि कोरोना की वजह से इम्युनिटी पर असर पड़ा है. ऐसे में मंकीपॉक्स वायरस कमजोर इम्युनिटी वालों को संक्रमित कर सकता है. खासतौर पर जो लोग पुरानी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं उनको किसी बीमार व्यक्ति से दूर रहना चाहिए.कमजोर इम्यूनिटी वालों के शरीर में किसी भी प्रकार का वायरस असर कर सकता है. भले ही मंकीपॉक्स कोरोना जितना खतरनाक नहीं है, लेकिन ऐसे लोगों को ये संक्रमित कर सकता है. 


इसके अलावा बच्चों और बुजुर्गों को भी एहतियात बरतनी चाहिए. इन लोगों की भी इम्यूनिटी कम होती है. ऐसे में उनको मंकीपॉक्स से संक्रमण हो सकता है. मंकीपॉक्स भले ही खतरनाक नहीं है, लेकिन बचाव जरूरी है. 


जंगली जानवरों से बनाएं दूरी

प्रोफेसर अरोड़ा कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति किसी संक्रमित जानवर के संपर्क में आता है, तो उसको मंकीपॉक्स हो सकता है. इसलिए यह जरूरी है कि बीमार जानवरों से दूरी बनाई जाए. जो लोग जंगलों में घूमने जाते हैं. उनके लिए जरूरी है कि वे बंदरों के संपर्क में न आए. इसके अलावा चिड़ियाघर में जानवरों की देखरेख करने वालों को भी बीमार जानवरों के संपर्क में नहीं आना चाहिए. क्योंकि इस बात की काफी है कि अगर संक्रमित जानवर के संपर्क में कोई व्यक्ति आया तो वह संक्रमित हो सकता है. 


हाइजीन का रखें ध्यान

एक्सपर्ट के मुताबिक, किसी भी प्रकार के वायरस या बैक्टीरिया से बचाव के लिए हैंड हाइजीन का ध्यान रखें. भोजन करने से पहले हाथ धोएं. जो लोग हार्ट, डायबिटीज और अन्य किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं वे मास्क भी लगाकर रखें. अगर घर में कोई व्यक्ति बीमार है और उसमें फ्लू के लक्षण हैं, तो ऐसे व्यक्ति से दूर रहें. क्योंकि अगर उस व्यक्ति में वायरस है तो कम इम्यूनिटी वालों में ये आसानी से फैल सकता है. 


पर्यावरण को नुकसान की वजह से फिर से सक्रिय हो रहे हैं पुराने वायरस

एक्सपर्ट के मुताबिक, लोग जंगलों में जाकर जानवरों के स्पेस में जा रहे हैं. ये प्रकृति के साथ खिलवाड़ हैं. जानवरों के संपर्क में आने से लोग इन वायरस के कैरियर बन रहे हैं. जिससे कई पुराने वायरस फिर से लौट रहे हैं. इसलिए ये बहुत जरूरी है कि जानवरों के संपर्क में आने से बचा जाए. जो लोग चिड़ियाघर में जानवरों की देखरेख कर रहे हैं. उन्हें इस समय खास सावधानी बरतने की जरूरत है.  


किसी महामारी का रूप ले सकता है मंकीपॉक्स

डॉ. के मुताबिक, मंकीपॉक्स किसी नई महामारी का रूप नहीं लेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि ये एक पुराना वायरस है. इसे आए हुए 60 सालों से भी ज्यादा का समय हो गया है. इस वायरस पर मौजूद चिकन और स्मॉल पॉक्स की वैक्सीन भी काम कर सकती है.  इन वैक्सीन के माध्यम से इस वायरस का इलाज़ किया जा सकता है.

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