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Sports news: क्या राजनीति का अजगर लील गया सौरव गांगुली की कुर्सी? अर्श से फर्श पर पहुंचे 'कोलकाता के राजकुमार'




भारत में हॉकी भले ही राष्ट्रीय खेल हो, लेकिन क्रिकेट को जो दर्जा प्राप्त है, बाकि खेल क्रिकेट के सामने टिकते ही नहीं हैं. अब दुनिया के सबसे ताकतवर बोर्ड भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को नया बॉस जल्दी मिलने वाला है. इसका औपचारिक ऐलान होना रह गया है. अभी तक इस संस्था के सर्वेसर्वा रहे 'कोलकाता के प्रिंस' सौरव गांगुली किनारे कर दिए गए हैं. उनकी जगह 1983 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे रोजर बिन्नी के सिर बीसीसीआई का ताज सजेगा, तो आइए इसे शुरुआत से समझते हैं. 



टीम इंडिया को बनाया था चैंपियन 

सौरव गांगुली वह नाम है जो भारतीय क्रिकेट इतिहास के क्षितिज में सबसे ऊपर है. मोहम्मद अजहरुद्दीन के बाद जब भारतीय टीम की कमान गांगुली के हाथ में आई, तो उन्होंने टीम इंडिया की दशा और दिशा दोनों बदल दी. उनकी कप्तानी में ही टीम इंडिया ने विदेशों में जीतना सीखा. वह अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और बेबाक बयानों को लेकर हमेशा ही चर्चा में रहे. उनकी करिश्माई कप्तानी में ही टीम इंडिया 2003 के वर्ल्ड कप में भी पहुंची थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के हाथों मात मिली.



विवादों से रहा गहरा रिश्ता 

सौरव गांगुली ने अपनी कप्तानी में ही युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, महेंद्र सिंह धोनी और हरभजन सिंह जैसे सितारे इंडियन क्रिकेट को दिए, जिसके लिए भारतीय क्रिकेट हमेशा ही उनका ऋणी रहेगा. उन्होंने अपनी कप्तानी में कई युवा क्रिकेटर्स को तराशा और टीम इंडिया में मौका दिया. अपने ताज में सफलता के रूप में हीरे जड़े गांगुली विवाद से भी अछूते नहीं रहे. चाहें उनका रिटायरमेंट लेना रहा या साल 2007 में वनडे टीम से बाहर होना. साल 2008 में गांगुली ने इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया. उन्होंने टीम इंडिया के लिए 113 टेस्ट मैच और 311 वनडे मैच खेले हैं. विवादों के बाद हर बार वह बड़ी ताकत से लौटे और अपनी धाक जमाई.



अचानक बने थे BCCI के 'भगवान'

क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद सौरव गांगुली ने क्रिकेट प्रशासक के रूप में वापसी करते हुए साल 2015 में बंगाल क्रिकेट बोर्ड के चीफ बने और चार साल तक इस पद पर बने रहे. 2019 में वह सर्वोच्य संस्था BCCI के चीफ बने और उनके साथ ही देश के गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह सचिव पद पर आसीन हुए. इसके बाद भारतीय जनता पार्टी से उनकी नजदीकियां बढ़ने लगीं और मीडिया में ये चर्चा होने लगी कि गांगुली साल 2021 बंगाल चुनाव से पहले BJP Join कर लेंगे, लेकिन दादा इसे हमेशा नकारते रहे. BCCI में दादा हर छोटे से बड़ा निर्णय खुद करने लगे. खबरें यहां तक आई कि वह सेलेक्शन कमेटी में बैठने लगे हैं, लेकिन उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को हमेशा निराधार बताया. 



अमित शाह ने किया था गांगुली के घर भोजन 

सौरव गांगुली की सबसे ज्यादा लोकप्रियता अगर कहीं थी, तो वह बंगाल ही था. पूरे बंगाल चुनाव में ये सवाल सिर उठाए खड़ा रहा कि अब गांगुली बीजेपी में कब शामिल होंगे? पिछले साल गृहमंत्री अमित शाह कोलकाता में सौरव गांगुली के घर में भोज के लिए पधारे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गृहमंत्री शाह ने उन्हें बीजेपी में आने का ऑफर दिया था. लेकिन गांगुली ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. तब से ही BCCI में एक वर्ग उनसे रूठ गया.



श्रीनिवासन गुट की वजह से गई कुर्सी?

दूसरी तरफ BCCI में दोबारा सेटल होने के लिए जी जान लगा रहे एन श्रीनिवासन ने सौरव गांगुली के दूसरे कार्यकाल का जमकर विरोध किया. श्रीनिवासन गुट का मानना है कि गांगुली ने बीसीसीआई ने उन Brands को खूब बढ़ावा दिया, जो बीसीसीआई के तगड़े प्रतिद्वंद्वी थे. लिहाजा बोर्ड की मीटिंग में वह अकेले पड़ गए और उनके अपनों ने ही उनका साथ नहीं दिया. वहीं, मीडिया के एक धड़े में यह बात भी सामने आई कि BCCI में दादा को IPL चेयरमैन बनने का ऑफर दिया गया, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया. 



कोहली से हुआ था तगड़ा मनमुटाव

सौरव गांगुली के कार्यकाल में विवाद की काली छाया भी रही. खेल जगत के जानकार बताते हैं कि विराट कोहली टी20 वर्ल्ड कप 2021 के बाद कैप्टन बने रहना चाहते थे, लेकिन तब BCCI ने उन्हें आनन फानन में हटाकर रोहित को टीम इंडिया की कमान सौंप दी. फिर कोहली और गांगुली के बीच जो छीछालेदर हुई वो जग जाहिर है. अब वक्त ने करवट बदल ली है और समय खुद को दोहरा रहा है. कोहली की ठीक जगह गांगुली खड़े हुए हैं वह पद पर रहना चाहते हैं, लेकिन ये किसी को भी मंजूर नहीं है.



अपने समय के बेहतरीन खिलाड़ी रहे और भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाईयों पर ले जाने वाले सौरव गांगुली आखिरकार खुद राजनीति के शिकार हो गए. ये देखने वाली बात ये होगी कि वह किस तरह से वापसी कर पाते हैं.



साभार 

गोविंद सिंह के फेसबुक वाल से 

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